देश में 57 प्रतिशत डाॅक्टर झोलाछाप


        विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के 57 फीसदी एलोपैथिक डाॅक्टर्स के पास मेडिकल योग्यता नहीं हैं। उनमें से एक तिहाई डाॅक्टर ऐसे हैं। जो केवल सेकेंडरी स्कूल तक ही शिक्षित हैं और दूसरों का इलाज कर रहे हैं।



            2011 की जनगणना के तथ्यों पर आधारित उब्लयूएचओ की रिपोर्ट द हेल्थ वर्कफोर्स इन इंडिया के अनुसार प्रति एक लाख की आबादी पर बिहार में मात्र 13.7 और झारखं डमें 15.2 डाॅक्टर मेडिकल योग्यता रखते हैं। हालांकि वर्ष 2005 के बाद चिकित्सा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव और विस्तार हुआ है। यह आम धारणा है कि बिना डिग्री के एलोपैथी की प्रैक्टिस करने वाले को क्वैक या झोलाछाप कहा जाता हैं।


        रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2011 में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 18.8 क्वालीफाइ थे। औसतन एक लाख की आबादी में 80 डाॅक्टरों में 36 डाॅक्टर ऐसे हैं, जिनके पास एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी से संबंधित कोई भी मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं हैं।



-अभिषेक खरे