ऐसे बनाएं पानी से रिश्ता 


  • दुनिया का कोई ऐसा उत्पाद नहीं, जिसके कच्च माल उत्पादन से लेकर अंतिम उत्पाद बनने की प्रक्रिया में पानी का इस्तेमाल न होता हों। अतः न्यूनतम उपीाोग करें। 
  • एक लीटर बोतलबंद पानी के उत्पादन में तीन लीटर पानी खर्च होता है। प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान, सो अलग। इसका उपयोग बंद करें। 
  • आरओ प्रणाली पानी की बर्बदी बढ़ाती है और मिनरल्स तथा सेहत के लिए जरूरी जीवाणु घटाती है। अति आवश्यक हो, तो फिल्टर अपनाएं। 
  • प्याऊ को पानी के व्यवसायीकरण के खिलाफ औजार बनाएं। पूर्वजों के नाम पर प्याऊ लगाएं।
  • स्नानघर-रसोई के जल निकासी पाइप व शौचालय के मल निकासी पाइप के लिए अलग-अलग चैम्बर बनाएं। रूफ टाॅप हार्वेस्टिंग अपनाएं।
  • जन्म, ब्याह, मृत्यु में तालाब दान का चलन शुरू करें। हर साल 20 जून से पहले नजदीक की सूखी नदी के घुमाव पर एक छोटा कुंड बनाएं।
  • बच्चों को नदी-तालाब-कुओं जैसे वास्तविक जलस्त्रोतों से परिचित कराएं, उनका महत्व बताएं। कथाएं और गीत सुनाएं। जलस्त्रोंतों से रिश्ता बनाएं।
  • बिल्डर अपने परिसर में जल-मल शोधन प्रणाली लगवाएं। पुनर्चक्रीकरण कर पानी का पुनः उपयोग बढ़ाएं।
  • फैक्टरी मालिक जितना पानी उपयोग करें, उतना और वैसा ही धरती को लौटाएं भी। शोधन संयंत्र लगवाएं, तालाब बनवाएं।
  • थ्कसान खेत की मेड़ ऊंची बनवाएं। सूखा रोधी बीज अपनाएं। कम अवधि व कम पानी की फसल व तरीके अपनाएं। देसी खाद व मल्चिंग अपनाकर मिट्टी की गुणवत्त व नमी बचाएं। बंूद-बंूद सिंचाई व फव्वारा पद्धति अपनाएं।