रागी में फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं, जिससे वजन और डायबिटीज को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके साथ ही इसमें कैल्शियम, स्वसथ काब्र्स, एमिनो एसिड और  विटामिन-डी भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

शुद्ध है रागी 

        उत्तर भारत में यह फिंगर, बाज
रा या नचनी के नाम से लोकप्रिय है। रागी का आटा या तो पीसकर तैयार किया जाता है या फिर इसे सुखाकर और कूटकर तैयार करते हैं। रगी में कार्बोहाइड्रेट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते है। चूंकि रागी के दाने बहुत छोटे होते हैं, इसलिए इसे पाॅलिश या प्रोसेस नहीं किया जाता है। इसी वजह से यह अपने शुद्ध स्वरूप में ही खाई जाती है।

रागी के स्वास्थ्य लाभ 

        कैल्शिमय से भरपूर रागी के आटे में किसी भी अनाज की तुलना में कैल्शियम सबसे ज्यादा पाया जाता है। रागी नाॅन-डेयरी प्रोडक्टक्स में कैल्शियम का सबसे अच्छा स्त्रोत है। कैल्शियम हड्डियों के स्वास्थ्य और  दांतों के लिए महत्वपूर्ण है और आॅस्टियोपोरोसिस की रोकथाम में भी मददगार होता है।

डायबिटीज नियंत्रण में सहायक 

        चावल, मक्का या गेहूं की तुलना में रागी के बीज का कोट पाॅलीफेनोल और डायटरी फाइबर से भरपूर होता है। इसे सुबह के नाश्ते या दोपहर के भोजन में खाएं। पूरे दिन आपके सिस्टम को ट्रैक पर बनाए रखने के लिए यह बहुत अच्छा साबित होता है।

आराम देने में सहायक 

         एंग्जायटी डिप्रेशन और अनिद्र से निपटने में रागी का नियमित सेवन बहुत फायदेमंद साबित होता है, कयोंकि इसमें एंटीआॅक्सिडेंट्स मौजूद होते हैं, जो तनाव घटाने में सहायक होत हैं।

वजन घटाने में मददगार 

        डाइटरी फाइबर की अधिक मात्रा पेट को लंबे समय तक भरा रखती है जिससे अनावश्यक खाने से बचने में मदद मिलती है। इससे कम भूख लगती हैं जिससे वजन घटने में मदद मिलती है।

ऐसे केरे सेवन

  • रागी का सेवन अक्सर रोटी के तोर पर किया जता है। आपको इसकी ज्यादा मात्रा अच्छी नहीं लगती है तो आप इसमें 7-3 के अनुपात में गेहूं का आटा मिलाएं और फिर इसकी रोटी बनाकर खाएं।
  • रागी कुकीज बाजार में उपलब्ध है।

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