एक्सरसाइज सेहत के लिए अच्छी है। एक्सरसाइज आयु बढ़ने के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव है। रिसर्च बताती है कि कसरत न केवल दिल और फेफड़ों में सुधार करती है बल्कि मामूली शारीरिक गतिविधि दिमाग, हड्डियों, मांसपेशियों और मूड के लिए अच्छी है। कई अध्ययनों में पाया गया कि जीवन भर एक्सरसाइज करने से लोग लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं, 40 लाइलाज बीमारियां रुकती हैं, याददाश्त और सीखने की क्षमता में गिरावट कम होती है, गिरने का खतरा घटता है, अवसाद, तनाव, बेचौनी से बचाव होता है। यह लोगों लंबे समय तक जीवित रहने में सहायक है। रिसर्च के अनुसार नियमित गतिविधि इन तरीकों से सहायता पहुंचाती है।
मांसपेशियों में सुधार
आयु बढ़ने के साथ मांसपेशियां कम होती हैं। उनकी ताकत घटती है। वेटलिफ्टिंग जैसी ट्रेनिंग इस गिरावट को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। इससे कुकिंग, सफाई और सीढ़ियां चढ़ने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां आसान हो जाती हैं। बीमारियां दूर भागती हैं, मस्तिष्क बेहतर होता है और मूड ठीक रहता है। लोग लंबे समय तक स्वतंत्र रूप से जिंदगी बिता सकते हैं।
हड्डियां मजबूत होती हैं
30 साल की आयु के आसपास हड्डियों का निर्माण कम होने लगता है। एक्सरसाइज से हड्डियों का घनत्व बढ़ता है, आकार ठोस होता है और हड्डियों को कमजोर करने वाली बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस रुकती है। वजन उठाने की एक्सरसाइज हड्डियों का आकार और उनकी ताकत बढ़ाती है। साइक्लिंग, योग और तैराकी भी फायदेमंद है।
डीएनए बेहतर होता है
शरीर के आवश्यक तत्व डीएनए के रेशों का ढक्कन टेलोमेरेस हैं। इनकी लंबाई आयु बढ़ने के साथ घटती है। टेलोमेरेस की लंबाई का संबंध हाई ब्लडप्रेशर, ब्रेन स्ट्रोक और दिल की बीमारी से है। रिसर्च से पता लगा है अधिक शारीरिक गतिविधि का संबंध टेलोमेरेस की लंबाई से है। टेलोमेरेस की लंबाई अधिक उम्र से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम करती है।
मानसिक सक्रियता
याददाश्त, सीखने, फैसले लेने, सोचने, समस्याएं सुलझाने की क्षमता बनाए रखने का सबसे अच्छा रास्ता शारीरिक गतिविधि है। अध्ययनों से पता लगा है एक्सरसाइज से अवसाद और बुढ़ापे की बीमारी अल्जाइमर को रोकने में मदद मिलती है। अमेरिकन एजिंग रिसर्च फेडरेशन के डायरेक्टर स्टीवन ऑस्टेड कहते हैं, कसरत से नींद भी अच्छी आती है।
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